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वार्षिकोत्सव 2010 की रौनकें



सुशील कुमार की पुस्तक 'तुम्हारे शब्दों से अलग' का विमोचन करते अतिथिगण

विगत 5 मार्च 2011 को हिन्द-युग्म ने अपना 'वार्षिकोत्सव 2010' मनाया। यह आयोजन नई दिल्ली के राजेन्द्र भवन सभागार में सुबह 11‍ः45 से दोपहर 3 बजे तक वरिष्ठ साहित्यकार वीरेन्द्र कुमार बरनवाल, वरिष्ठ कवयित्री अनामिका, प्रसिद्ध बाल साहित्यकार और लेखक प्रकाश मनु, वरिष्ठ कथाकार पंकज बिष्ट, युवा कवि सुशील कुमार, वरिष्ठ कवयित्री डॉ. मधु चतुर्वेदी इत्यादि के सानिध्य में संपन्न हुआ। संचालन हरियाणा के वरिष्ठ साहित्यकार श्याम सखा श्याम ने किया।

कार्यक्रम कई चरणों में विभाजित था। कार्यक्रम की शुरूआत एक लघु फिल्म 'इट्स रिंगिंग' के प्रदर्शन से हुई। गौरतलब है कि इस फिल्म का निर्माण हिन्द-युग्मी दिव्य प्रकाश दुबे और इनके साथी मित्रों की कम्पनी मास्टर-स्ट्रोक प्रोडक्शन ने किया है। यह लघु फिल्म फरवरी 2011 में भुवनेश्वर में आयोजित हुए एक अंतरराष्ट्रीय लघु फिल्म महोत्सव में निर्णायकों का ध्यान खींच चुकी है। हिन्द-युग्म ने इस फिल्म का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन किया।


प्रदर्शित फिल्म 'इट्स रिन्गिंग' का एक दृश्य'

इसी कार्यक्रम में वर्ष 2010 के 12 यूनिकवियों को सम्मानित किया गया। यूनिकवि सम्मान 2010 से सम्मानित कवियों में एम॰ वर्मा, कृष्णकांत, विमल चंद्र पाण्डेय, संजीव कुमार सिंह, मृत्युंजय साधक, आलोक उपाध्याय 'नज़र', अनिल कार्की, सुभाष राय, महेन्द्र वर्मा, अपर्णा भटनागर, वसीम अकरम और स्वप्निल तिवारी आतिश शामिल हैं। इस उत्सव में समय-समय पर सम्मानित यूनिकवियों ने अपनी प्रतिनिधि कविता का पाठ भी किया। काव्यपाठ करने वाले कवियों में कृष्णकांत, अनिल कार्की, स्वप्निल तिवारी आतिश, आलोक उपाध्याय 'नज़र', एम॰ वर्मा, मृत्युंजय साधक और वसीम अकरम के नाम प्रमुख हैं।


यूनिकवि सम्मान ग्रहण करते कवि स्वप्निल तिवारी 'आतिश'

युवा कवि सुशील कुमार के कविता-संग्रह 'तुम्हारे शब्दों का विमोचन' मुख्य अतिथि वीरेन्द्र कुमार बरनवाल और अन्य उपस्थित अतिथियों के कर कमलों के द्वारा हुआ। सुशील कुमार हिन्दी के चर्चित युवा कवि हैं और अपने खास तेवर और शैली के लिए पहचाने जाते हैं।


काव्यपाठ करते यूनिकवि कृष्णकांत


पॉवर प्वाइंट पर 'हिन्द-युग्म'

हिन्द-युग्म ने अपने इस वार्षिकोत्सव से 3 नये तरह के सम्मान देने की शुरूआत की है। इस कड़ी में पहला सम्मान 'हिन्द-युग्म शमशेर अहमद खान बाल साहित्यकार सम्मान 2011' है। यह सम्मान हिन्दी के महत्वपूर्ण बाल साहित्यकार, पर्यावरणविद और लेखक शमशेर अहमद खान की स्मृति में शुरू हुआ है। उल्लेखनीय है कि शमशेर अहमद खान का पिछले महीने ब्लड कैंसर नामक भयंकर बीमारी से देहावसान हो गया था। शमशेर अहमद खान हिन्द-युग्म से भी जुड़े थे और हिन्द-युग्म के लिए दिल्ली और इसे आस-पास के स्थानों की साहित्यिक और सांस्कृतिक रिपोर्टिंग करते रहे थे। शमशेर अहमद खान के नाम का सम्मान हिन्द-युग्म ने दो वरिष्ठ सदस्यों श्रीमती सुनीता प्रेम यादव और श्रीमती रंजना भाटिया 'रंजू' को प्रदान किया गया। जहाँ श्रीमती सुनीता प्रेम यादव को यह सम्मान बाल-साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए प्रदान किया गया, वहीं श्रीमती रंजना भाटिया को यह सम्मान बाल-साहित्य के रचनाकर्म में लम्बे समय से योगदान करने के लिए दिया गया।


सम्मान ग्रहण करतीं श्रीमती रंजना भाटिया 'रंजू'


श्रीमती सुनीता प्रेम यादव के लिए सम्मान ग्रहण करतीं श्रीमती नीलम मिश्रा

हिन्द-युग्म ने दूसरा सम्मान असम राज्य के प्रमुख गांधीवादी नेता लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलोई के नाम पर आरम्भ किया है। गोपीनाथ बारदोलोई पूर्वोत्तर में हिन्दी के प्रचार-प्रसार और राष्ट्रीय एकता का पक्ष लेने वालों में अग्रणी थे। भारत रत्न लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलोई असम के पहले मु्ख्य मंत्री थे और इनकी अध्यक्षता में असम हिन्दी प्रचार समिति की स्थापना हुई थी। 'हिन्द-युग्म लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलोई हिन्दी सेवी सम्मान 2011' हिन्द-युग्म के सबसे चर्चित स्तम्भ 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के स्तम्भकार श्री सुजॉय चटर्जी को दिया गया है। सुजॉय चटर्जी मूलरूप से असम के हैं, इनकी मातृभाषा बंगाली है, लेकिन विगत 2 वर्षों से 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के माध्यम से रोज़ाना सदाबहार हिन्दी फिल्मी गीतों की चर्चा हिन्दी में कर रहे हैं। 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के अभी तक 610 से भी अधिक एपिसोड प्रकाशित हो चुके हैं। सुजॉय ने एक और नया कॉलम 'सुर-संगम' आरम्भ किया है, जिसमें वे उन गीतों की बात करते हैं जो शास्त्रीय-संगीत से ओत-प्रोत या प्रभावित हैं। यह सम्मान एक गैर हिन्दीभाषी द्वारा हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान के लिए निर्धारित किया गया है।


सम्मान ग्रहण करते सुजॉय चटर्जी

तीसरा महत्वपूर्ण सम्मान संगीत निर्माण में उल्लेखनीय योगदान तथा योगदान के लिए ऋषि एस को प्रदान किया। यह सम्मान हिन्दी फिल्मी संगीत के बेहद मशहूर और प्रतिभावान संगीतकार सी. रामचंद्र (चितलकर) के नाम पर 'हिन्द-युग्म अन्ना साहब संगीत सम्मान' के रूप में शुरू किया गया है। हम सभी जानते हैं कि अन्ना साहब संगीत में बदलावों के पक्षधर थे और इन्होंने पारम्परिक संगीत निर्माण से बहुत अलग जाकर लोकप्रिय धुनों की रचना की। ऋषि एस हिन्द-युग्म के आदि संगीतकार हैं। आज हिन्द-युग्म ने 70 से अधिक गीतों को संगीतबद्ध किया है, जिसमें 10 से अधिक कविताओं को संगीतबद्ध करना भी शामिल है। ऋषि एस एक ऐसे युवा संगीतकार हैं जिन्होंने उस समय कविताओं को संगीतबद्ध करने की चुनौती स्वीकारी जब हिन्द-युग्म ने ऐसा करने का केवल विचार ही रखा था। ऋषि एस की ओर से यह सम्मान पुणे से पधारे महफिल-ए-गज़ल के स्तम्भकार और कवि विश्व दीपक ने ग्रहण किया।


संगीता स्वरूप की पुस्तक 'उजला आसमाँ' का लोकार्पण

इसी कार्यक्रम में युवा कवयित्री श्रीमती संगीता स्वरूप के कविता-संग्रह 'उजला आसमाँ' का विमोचन भी वरिष्ठ कवयित्री डॉ. मधु चतुर्वेदी के हाथों हुआ।

वरिष्ठ साहित्यकार और बाल-साहित्य-मीमांसक प्रकाश मनु ने बाल-साहित्य से जुड़ने के अपने अनुभव बाँटे, वहीं मुख्य अतिथि वीरेन्द्र कुमार बरनवाल ने कहा कि हिन्द-युग्म ने लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलोई के नाम पर सम्मान शुरू करके एक उल्लेखनीय काम किया है। यह बहुत खुशी की बात है कि गाँधी जी के समय के एक ऐसे नेता को हिन्द-युग्म याद कर रहा है, जिन्होंने हिन्दी भाषा को पूर्वोत्तर में रोपने का काम किया।


अपना वक्तव्य देते प्रकाश मनु


अपना वक्तव्य देते वीरेन्द्र कुमार बरनवाल

वरिष्ठ कवयित्री अनामिका ने कहा कि इंटरनेट हमारी विलम्बित और निलम्बित सपनों को पूरा करने का माध्यम है। इस वर्चुअल स्पेस में हर किसी के लिए स्पेस है, जहाँ आपके सपनीले आँगन में कोई ढेला नहीं फेंक सकता। बहुत से युवा बनना कुछ चाहते हैं और बन कुछ जाते हैं। इंटरनेट उन्हीं अधूरे सपनों को पूरा करने का मौका देती है। इसमें अनंत सम्भावनाएँ हैं, और मुझे खुशी है कि हिन्द-युग्म ने इस माध्यम का बहुत ही सकारात्मक इस्तेमाल किया है।


अपना वक्तव्य देतीं अनामिका

धन्यवाद ज्ञापन श्री प्रेमचंद सहजवाला ने किया।

कार्यक्रम के तस्वीरों की स्लाइड शो


हिन्द-युग्म के वार्षिकोत्सव 2010 में आप सभी का स्वागत है


वर्ष 2008 के दिसम्बर माह से हिन्द-युग्म अपना वार्षिक समारोह आयोजित करना आरम्भ किया है। वर्ष 2009 का वार्षिकोत्सव हिन्द-युग्म ने 19वें विश्व पुस्तक मेला, प्रगति मैदान में आयोजित किया था। इस कार्यक्रम के माध्यम से हिन्द-युग्म अपनी ऑनलाइन उपस्थिति की धमक को इंटरनेट के बाहर की दुनिया तक पहुँचाना चाहता है।

हिन्द-युग्म वर्ष 2010 का वार्षिकोत्सव शनिवार, 05 मार्च 2011 को नई दिल्ली में आयोजित करने जा रहा है। अपने पुराने कार्यक्रमों से अलग हिन्द-युग्म इस कार्यक्रम में कुछ नये कार्यक्रम भी जोड़ रहा है। इस कार्यक्रम को हिन्द-युग्म एक ब्लॉगर मिलन समारोह के तौर पर भी देख रहा है क्योंकि इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से ढेरों ब्लॉगर सम्मिलित हो रहे हैं।

कार्यक्रम का विवरण निम्नवत हैः-


दिन व समयः शनिवार 05 मार्च 2011, सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक। दोपहर 2-3 भोजन।
स्थानः राजेन्द्र भवन ट्रस्ट सभागार, 210, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग, निकट आईटीओ, नई दिल्ली-01
मुख्य अतिथिः वीरेन्द्र कुमार बरनवाल, वरिष्ठ साहित्यकार
विशिष्ट अतिथिः अनामिका, वरिष्ठ कवयित्री, डॉ॰ हरिकृष्ण देवसरे, वरिष्ठ बालसाहित्यकार, प्रकाश मनु, वरिष्ठ बाल साहित्यकार।
संचालनः डॉ. श्याम सखा 'श्याम'
मुख्य आकर्षणः

वर्ष 2010 के 12 यूनिकवियों का काव्यपाठ और उनका सम्मान,

सुनीता प्रेम यादव और रंजना भाटिया को हिन्द-युग्म शमशेर अहमद खान बाल साहित्यकार सम्मान,

सुजॉय चटर्जी को हिन्द-युग्म लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलोई हिन्दी सेवी सम्मान,

ऋषि एस. को हिन्द-युग्म अन्ना साहब संगीत सम्मान,

मास्टरस्ट्रोक प्रोडक्शन की लघु फिल्म 'इट्स रिंगिंग' का प्रदर्शन।

युवा कवि सुशील कुमार के काव्य-संग्रह 'तुम्हारे शब्दों से अलग' का विमोचन।

पुस्तक का विमोचन वरिष्ठ कवि वीरेन्द्र कुमार बरनवाल के करकमलों द्वारा होगा।

यूनिकवियों का सम्मान वरिष्ठ कवि वीरेन्द्र कुमार बरनवाल और कवयित्री अनामिका के कर-कमलों से होगा।

सुजॉय चटर्जी और ऋषि एस. का सम्मान वरिष्ठ साहित्यकार वीरेन्द्र कुमार बरनवाल अपने करकमलों द्वारा करेंगे।

सुनीता प्रेम यादव और रंजना भाटिया 'रंजू' का सम्मान डॉ॰ हरिकृष्ण देवसरे और प्रकाश मनु के द्वारा होगा।

सभी यूनिकवि को अपनी प्रतिनिधि कविता का पाठ करेंगे।

वरिष्ठ कवि सुरेश यादव तुम्हारे शब्दों से अलग पुस्तक पर अपनी टिप्पणी देंगे।

सम्मानित होने वाले यूनिकवियों की सूची
एम॰ वर्मा
कृष्णकांत
विमल चंद्र पाण्डेय
संजीव कुमार सिंह
मृत्युंजय साधक
आलोक उपाध्याय 'नज़र'
अनिल कार्की
सुभाष राय
महेन्द्र वर्मा
अपर्णा भटनागर
वसीम अकरम
स्वप्निल तिवारी आतिश

हिन्द-युग्म शमशेर अहमद खान बालसाहित्यकार सम्मान 2011


उल्लेखनीय है कि सक्रिय हिन्द-युग्मी, पर्यावरणविद, वरिष्ठ बालसाहित्यकार और पत्रकार शमशेर अहमद खान का ब्लड कैंसर की वजह से असामयिक निधन हो गया। हम इस वार्षिकोत्सव से 'हिन्द-युग्म शमशेर अहमद खान बालसाहित्यकार सम्मान' की शुरूआत कर रहे हैं। यह सम्मान हिन्दी के ऑनलाइन बाल-साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले लेखकों को प्रदान किया जायेगा। इस वर्ष यह सम्मान बाल-उद्यान में लम्बे समय से सक्रिय योगदान कर रहीं श्रीमती सुनीता प्रेम यादव और श्रीमती रंजना भाटिया 'रंजू' को प्रदान किया जा रहा है। शमशेर जी की स्मृति में युवा कवि-लेखक रामजी यादव अपना वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे।

सुनीता प्रेम यादव
39 वर्षीय सुनीता प्रेम यादव मूल रूप से एक कवयित्री हैं। इन्होंने बाल रचनाएँ बहुत कम लिखी हैं, लेकिन बाल-साहित्य को बच्चों तक पहुँचाने के लिए इन्होंने बहुत से रचनात्मक योगदान दिये हैं। सुनीता औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में दर्जनों आयोजन करके बाल-साहित्य को बाल सुलभ बनाने का काम किया है। सुनीता ने ऑडियो-विधा के माध्यम से भी बाल-साहित्य को अपने शहर के बच्चों में लोकप्रिय बनाया है। सुनीता की ही ऊर्जा से बाल-उद्यान फला-फूला है। सुनीता ने महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा, पुणे के साथ मिलकर बाल-उद्यान के कई कार्यक्रम किये। इनका विस्तृत परिचय पढ़ने और इनके योगदान के बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।

रंजना भाटिया 'रंजू'

दिल्ली की रंजना भाटिया का एक स्तम्भ 'दीदी की पाती' बाल-उद्यान का बेहद लोकप्रिय स्तम्भ है। इस माध्यम से रंजना भाटिया ने बाल-सुलभ शैली में अद्‍भुत और रोचक जानकारियाँ बच्चों को बाँटी। यह स्तम्भ इतना लोकप्रिय हुआ कि कई समाचार-पत्रों ने इसे जस-का-तस अपने यहाँ स्थान दिया। रंजना भाटिया हिन्द-युग्म के बाल-उद्यान पर 2007 से सक्रिय हुईं और लगभग इसी समय से इन्होंने बच्चों के लिए लिखना शुरू किया और बहुत जल्द इसमें महारत हासिल कर ली। हिन्द-युग्म इनको सम्मानित करके अभिभूत है। रंजना का पूरा परिचय पढ़ने और उनके योगदानों को जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।

हिन्द-युग्म लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलोई हिन्दी सेवी सम्मान 2011


हिन्द-युग्म पर सबसे सक्रिय योगदान करने वाले लोग गैर हिन्दी भाषी हैं। ऐसा ही एक नाम सुजॉय चटर्जी का है। सुजॉय चटर्जी ने आवाज़ के 'ओल्ड इज़ गोल्ड' नामक एक दैनिक स्तम्भ की शुरूआत की। सुजॉय की मातृभाषा बंगाली है और वे प्रतिदिन ओल्ड इज गोल्ड स्तम्भ पर हिन्दी में लिखते हैं। सुजॉय चटर्जी को वर्ष 2011 का 'हिन्द युग्म लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलाई हिन्दी सेवी सम्मान' प्रदान किया जा रहा है। लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलाई असम राज्य के पहले मुख्यमंत्री थे और इनकी अध्यक्षता में असम हिन्दी प्रचार समिति का गठन हुआ। बाद में इसी संस्था का नामकरण असम राष्ट्रभाषा प्रचार सभा कर दिया गया। स्वतंत्रता आंदोलन के समय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने पूर्वोत्तर में राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए बाबा राघव दास और कमल नारायणदेव को असम भेजा था। इनलोगों के विचार को आगे बढ़कर लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलाई ने स्वागत किया। पूर्वोत्तर में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में भारत रत्‍न लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलाई का योगदान अतुलनीय है। हिन्द-युग्म इन्हीं को श्रद्धांजलि स्वरूप इस सम्मान की शुरूआत कर रहा है।

सुजॉय चटर्जी
सुजॉय चटर्जी हिन्द-युग्म के सक्रियतम स्तम्भकार हैं और 'आवाज़' के लगभग 900 ईमेल सब्सक्राइबर इन्हीं के स्तम्भ 'ओल्ड इज गोल्ड' के प्रसंशक हैं। सुजॉय की मातृभाषा बांग्ला है, पेशे से इंजीनियर हैं और चंडीगढ़ में रहते हैं। हिन्दी में खुद ही टाइप भी करते हैं। 20 फरवरी 2009 से सुजॉय ने हिन्द-युग्म पर ओल्ड इज़ गोल्ड शृंखला की शुरूआत की, जिसमें पुराने अमर फिल्मी गीतों की पूरी चर्चा हिन्दी में होती है। सुजॉय बहुत रोचक ढंग से गीतों की चर्चा करते हैं, गीत आधारित पहेली पूछते हैं। इसमें गीत भी सुनवाया जाता है। अब तक इस स्तम्भ में 601 आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। इन दिनों इन्होंने आवाज़ पर एक साहित्यिक स्तम्भ 'सुर-संगम' की भी शुरूआत की है, जिसके 9 अंक प्रकाशित-प्रसारित हो चुके हैं। इस माध्यम से सुजॉय शास्त्रीय संगीत के कुछ सूक्ष्म पक्षों को एक तार में पिरोने की एक कोशिश करते हैं।

हिन्द-युग्म अन्ना साहब संगीत सम्मान 2011


हिन्द-युग्म ने वर्ष 2007 के अक्टूबर माह से एक बिलकुल अनूठी शुरूआत की थी। वह शुरूआत थी ऑनलाइन संगीत को रचना। इस संकल्पना को मूर्त रूप दिया था ऋषि एस बालाजी ने। हिन्द-युग्म के सजीव सारथी इस बात को लेकर निश्चिंत नहीं थे कि ऑनलाइन संगीत रचा जा सकता है, लेकिन ऋषि एस. थे। और ऋषि एस. ने यह कर दिखाया। आज हमें यह कहीं भी बताते हुए बहुत खुशी होती है कि हिन्द-युग्म ने ऑनलाइन ही 100 से अधिक गाने बनाये हैं। हम इसे एक ऑनलाइन संगीत क्रांति मानते हैं। हिन्दी फिल्म संगीत में एक क्रांति के अग्रदूत अन्नासाहब या चितलकर नरहर रामचंद्र या सी. रामचंद्र थे। वे संगीत में नित नये प्रयोग में विश्वास रखते थें। हम उनकी स्मृति में एक सम्मान ऋषि एस को दे रहे हैं।

ऋषि एस॰
ऋषि एस॰ ने हिन्द-युग्म पर इंटरनेट की जुगलबंदी से संगीतबद्ध गीतों के निर्माण की नींव डाली है। पेशे से इंजीनियर ऋषि ने सजीव सारथी के बोलों (सुबह की ताज़गी) को अक्टूबर 2007 में संगीतबद्ध किया जो हिन्द-युग्म का पहला संगीतबद्ध गीत बना। हिन्द-युग्म के पहले एल्बम 'पहला सुर' में ऋषि के 3 गीत संकलित थे। ऋषि ने हिन्द-युग्म के दूसरे संगीतबद्ध सत्र में भी 5 गीतों में संगीत दिया। हिन्द-युग्म के थीम-गीत को भी संगीतबद्ध करने का श्रेय ऋषि एस॰ को जाता है। इसके अतिरिक्त ऋषि ने भारत-रूस मित्रता गीत 'द्रुजबा' को संगीत किया। मातृ दिवस के उपलक्ष्य में भी एक गीत का निर्माण किया। इन दिनों ये रश्मि प्रभा की कविताओं को संगीतबद्ध कर रहे हैं।भारतीय फिल्म संगीत को कुछ नया देने का इरादा रखते हैं।

पुस्तक विमोचन


तुम्हारे शब्दों से अलग
यह हिन्द-युग्म प्रकाशन की सोलहवीं पुस्तक है। हिन्द-युग्म ने वर्ष 2010 के विश्व पुस्तक मेला से अपना प्रकाशन भी शुरू किया है, जिसके माध्यम से विश्वस्तरीय साहित्य को विश्व स्तरीय प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल करके प्रकाशित किया है। मात्र एक वर्ष में ही हिन्द-युग्म ने अपने मात्र 16 प्रकाशनों से हिन्दी प्रकाशन का ध्यान अपनी ओर खींचा है। प्रस्तुत पुस्तक युवा कवि सुशील कुमार का कविता संग्रह है। इस कविता संग्रह और कवि के बारे में वरिष्ठ कवि अरुण कमल कहते हैं-
सुशील कुमार विलक्षण कवि हैं। इन कविताओं की भूमि स्वयं कवि का जीवन है, और कवि की सहानुभूति की परिधि में आयत्त संपूर्ण समाज। बहुत प्रेम और अपनपों से कवि ने दमित-पीड़ित जन के जीवन को भाषा में स्थायित्व दिया है। इन कविताओं का संसार हम सब का जाना-पहचाना, रोज़-ब-रोज़ का संसार है।

इस पुस्तक की ऑनलाइन चर्चा यहाँ पढें।

लघु फिल्म प्रदर्शन


हिन्द-युग्म काफी समय से दृश्व और श्रव्य माध्यमों में काम कर रहा है। हिन्द-युग्म से परिचित प्रत्येक व्यक्ति इसके 'आवाज़' मंच का मुरीद है। हिन्द-युग्म ने बहुत से गीतों के वीडियो भी बनाये हैं। कुछ समय ने हिन्द-युग्म ने लघु फिल्मों के निर्माण पर भी गंभीरता से काम कर रहा है। इस दिशा में ढेरों प्रोडक्शन कम्पनियाँ हिन्द-युग्म के साथ काम कर रही हैं। ऐसी एक प्रोडक्शन कम्पनी है 'मास्टरस्ट्रोक प्रोडक्शन', जिसके संचालक हिन्द-युग्मी दिव्य प्रकाश दुबे और इनके कुछ साथी हैं। इस प्रोडक्शन कम्पनी ने ही हिन्द-युग्म का प्रमोशनल वीडियो बनाया है। इस प्रोडक्शन कम्पनी की एक लघु-फिल्म 'इट्स रिंगिंग' भी इस कार्यक्रम में प्रदर्शित होगी।

इट्स रिंगिंग
यह एक लघु फिल्म है जो 25 फरवरी 2011 को भुवनेश्वर में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय लघु फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित की गई। यह आजकल बहुत तेज़ी से हो रहे MMS Scandal पर आधारित है। यह फिल्म महानगर में रहने वाले नवविहाहित जोड़ों की कहानी पर आधारित है। फिल्म नव दंपत्तियों द्वारा अपने बेहद निजी पलों को मोबाइल में कैद करने और उसके लापरवाही से चोरी हो जाने की बात करती है। फिल्म की पटकथा दिव्य प्रकाश दुबे की है और निर्देशन सामर्थ गर्ग का है। फिल्म में संगीत हिन्द-युग्म के ही प्रतिभावान संगीतकार श्रीनिवास पांडा का है।

कार्यक्रम स्थल तक कैसे पहुँचें


बस से आने वाले आगंतुकः

ITO बस-स्टैंड पर उतरें। वहाँ से किसी से पूछकर रामचरण अग्रवाल चौक तक पहुँचें। इस चौक से दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर पैदल आगे बढ़ें। इस मार्ग से चलते हुए बायीं ओर ही, लगभग 500 मीटर आगे गांधी शांति प्रतिष्ठान है, इससे थोड़ा आगे दाहिनी ओर (सामने की दिशा में) अणुव्रत भवन है, इसके ठीक बगल में राजेन्द्र भवन सभागार है।

मेट्रो से आने वाले आगंतुकः

'मंडी हाउस' मेट्रो स्टेशन पर उतरें और 'हिमाचल भवन' निकास की तरफ निकलें। यहाँ से पैदल रास्ता भी है, किसी से पूछ लें या यहीं से दीन दयाल उपाध्याय मार्ग के लिए ऑटो ले लें। यदि मेट्रो-यात्री प्रगति मैदान भी उतरें तो लगभग यही दूरी पड़ेगी। यदि आप प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन पर उतर रहे हैं तो प्रगति मैदान के गेट नं 8 या 9 की तरफ निकलें।

निजी वाहन/टैक्सी से आने वाले आगंतुकः

इसके लिए गूगल मैप में कार्यक्रम-स्थल यहाँ से देखें।

इस कार्यक्रम में भाग लेने लंदन से श्रीमती शन्नो अग्रवाल, हैदराबाद से डॉ॰ रमा द्विवेदी, पुणे से विश्व दीपक, लखनऊ से दिव्य प्रकाश दुबे, लखनऊ से ही सुभाष राय, औरंगाबाद से श्रीमती सुनीता प्रेम यादव, चंडीगढ़ से सुजॉय चटर्जी, करनाल से श्याम सखा श्याम इत्यादि आ रहे हैं। आप सभी आइए, कार्यक्रम का आनंद उठाने के साथ-साथ, ब्लॉग की दुनिया के हस्ताक्षरों से मिलने।