बादल-बिजली गड़गड़-कड़कड़ चमके सारी रात।
टिप्-टिप्-टिप्-टिप् टिप्-टिप्-टिप्-टिप् सावन की बरसात।।
खिड़की-कुण्डी खड़खड़-खड़खड़ सन्नाटे का शोर
करवट-करवट जागा करता मेरे मन का चोर
मेढक-झींगुर जाने क्या-क्या कहते सारी रात
टिप्-टिप्-टिप्-टिप् टिप्-टिप्-टिप्-टिप् सावन की बरसात।।
अंधकार की आँखें आहट और कान खरगोश
अपनी धड़कन पूछ रही है तू क्यों है खामोश
मिट्टी की दीवारें लिखतीं चिट्ठी सारी रात
टिप्-टिप्-टिप्-टिप् टिप्-टिप्-टिप्-टिप् सावन की बरसात।।
बूढ़े बरगद पर भी देखो मौसम की है छाप
नयी पत्तियाँ नयी लताएं लिपट रहीं चुपचाप
जुगनू-जुगनू टिम-टिम तारे उड़ते सारी रात
टिप्-टिप्-टिप्-टिप् टिप्-टिप्-टिप्-टिप् सावन की बरसात।।
टुकुर-टुकुर देखा करती है सपने एक हजार
पके आम के नीचे बैठी बुढ़िया चौकीदार
उसकी मुट्ठी से फिसले है गुठली सारी रात
टिप्-टिप्-टिप्-टिप् टिप्-टिप्-टिप्-टिप् सावन की बरसात।।
कवि- देवेन्द्र कुमार पाण्डेय






