फटाफट (25 नई पोस्ट):

कृपया निम्नलिखित लिंक देखें- Please see the following links

आओ सब मिल कर प्रेम को परमात्मा मान लाते हैं


आओ मिल कर खोजें प्यार
लुप्त प्रजातियों की भाँति।
चाहो तो पूछ लो
अरगनी पर टाँगे चाँद से
या फिर डाल दो इक मेल
मंगल को।
परिंदों,
किसी खुली खिड़की से घुस जाओ
आसमान के घर में
या फिर डाल्फिन से कहो
खोजे समुंदर के तलहट में
हो सकता है
टाइटॅनिक के नीचे दबा हो प्यार।
कोयला खदान के मालिको
ज़रा छू कर देखना धरती की कोख
शायद वहाँ पल रहा हो प्यार।

क्रेन-ऑन्स*।

हाँ प्रेम का ही भ्रूण था
गर्भपात

वर्तमान और निकट भविष्य में भी
प्रेम इतना दुर्लभ है
कि आओ सब मिल कर
प्रेम को परमात्मा मान लाते हैं।

हम दोनो को खोजते रहना चाहते हैं
पाना नही।

अभी खबर आयी है
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में
पाए गये है दो लोग प्यार करते हुए
एक को गोली मारी गयी
दूसरे को काटा गया गडासे से
प्यार का खून पा
लहलहा गयी प्रधान की चुनावी फसल
पंच के फ़ैसले पर
उठा ले गये कुछ लोग प्रेमी की बहन को
खेत में
परमात्मा प्रेम का हश्र देख
बिला गये है जाने कहाँ

देख ले रे नकुला
जंघवा पर तिल।

हो हो हो

कै बरिस के होई
ए फ़ैसला त पंचे करिहे।

खी खी खी

सारे गाँव वाले खिखिया कर
हँस रहे थे पर
खेत शर्मिंदगी झेल नही पाए
सूखा गयी सरसों
किरा गये धान
सारे पत्ते गिरा कर
नंगी औंधी पड़ी है अरहर
गाँव के बीचो बीच
लड़की की तरह.

(*खदानों मे क्रेन्स के इस्तेमाल से संबंधित शब्द)

कवि- अखिलेश श्रीवास्तव