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उदास आँखों वाली लड़की के मेलबॉक्स खँगालना चाहता हूँ


आज पढ़िए युवा कवि फ़ज़ल इमा मल्लिक की एक कविता, जिसमें शायद आपको कुछ बिल्कुल नये और कुछ जाने-पहचाने रंग मिले।Fa

उदास आँखों वाली लड़की

(एक)

लड़की की उदास
और ख़ामोश आँखें
बेइंतहा बातें करती हैं
लेकिन अपनी उदासी का सबब
नहीं बताती है लड़की

हर रात लड़की की आँखों में
उतर कर उसकी चुप्पी, उसकी उदासी
उसकी ख़ामोशी का
सबब जानने की कोशिश करता हूँ
आँखों में उतरते ही
लड़की अपनी पलकें मूँद लेती है
और सारी रात
लड़की की आँखों में बसी उदासी
के साथ बातें करता
उसके होंठों पर खिलाने की कोशिश करता हूँ
मुस्कुराहटों के फूल
लड़की को देना चाहता हूँ
एक भरा-पूरा आकाश
और भरना चाहता हूँ उसके सपनों में रंग

सुबह होते ही लड़की
अपने पलकें खोलती है
और मैं लड़की की कुछ चुप्पी
कुछ उदासी, कुछ ख़ामोशी
अपने साथ लेकर
उसकी आँखों से बाहर आ जाता हूँ
अगली रात के इंतज़ार में।

(दो)

लड़की की उदास और
गहरी आँखों में उतर कर
उसके मेल बाक्स को
खँगलाना चाहता हूँ
और पढ़ना चाहता हूँ
आए कुछ सुखों के
कुछ दुखों के मेल
ताकि जान सकूँ
लड़की की उदासी का सबब

लड़की ने अपना मेल आईडी
और पासवर्ड मुझे बता रखा है
नहीं बताया है तो उदासी का सबब
बस कभी-कभी फ़ेसबुक पर
चैट कर लेती है लड़की
पर बताती नहीं है बहुत कुछ
कभी जब बताने को राज़ी होती है लड़की
तो नेटवर्क फ़ेल हो जाता है
फिर भी एक दिन
चैट करते हुए लड़की ने इतना भर बताया
मां को लक़वा है
पिता भी बीमार रहते हैं
भाई को मेरा
बाहर निकलतना पसंद नहीं है
इतना बता कर
ख़ामोश हो गई थी लड़की

इसलिए लड़की की
आँखों में उतर कर
खंगालना चाहता हूँ
उसके मेल बाक्स को
पर ऐसा हो नहीं पाता
लड़की का मेल आईडी
और पासवर्ड भरने से पहले ही
लड़की मूँद लेती हैं अपनी पलकें
गहरी हो जाती है उसकी उदासी
और मैं भूल जाता हूँ
मेल आईडी और पासवर्ड

लड़की की उदासी
से एक अजब सा रिश्ता जुड़ गया है
उसकी उदासी
उसकी ख़ामोशी
अब मुझे अच्छी लगने लगी है।