मेमने की तलाश
सिंहकक्ष में,
नेष्ट से श्रेष्ट
तक यात्रा
उत्तरोत्तर उत्साह
त्वरण देती है,
सिंहासन पर आसीन
मुख पर ,
आत्मीय भावों की प्राप्ति
बहुत ..........
बहुत बडी
उपलब्धि होती है |
उंगली पर लगी
स्याही गदगद ,
विभोर है मतपेटी,
तनी है मुहर !
उदास केवल
मतपत्र ,
वही एक नश्वर ,
शेष सभी शाश्वत |
पिटता,
मुडता,
और उदरस्थ
मतपत्र मेमना !
डकारता संचार तंत्र ,
चटकारे लेते अखबार ,
स्वाद पर परिचर्चा ,
चरम विश्वास का |
आरम्भ पतन का |
और
एक बार फिर ,
अंकुरण
अंतहीन
चमत्कार की तलाश का |
इस बार कुछ एसा हो,
सर्वे भवन्तु सुखिनः !
उतरता ज्वार
सिंहासन आभारी
गगनोन्मुख हस्त दृग,
नहीं देख पाते,
मेमने के पदचिन्ह,
जो सिंह मांद में
प्रवेश के है,
निकलने के नहीं |






