फटाफट (25 नई पोस्ट):

Saturday, June 27, 2009

आख़िरी ख्वाहिश


आख़िरी ख्वाहिश है पूरा कर दूं
कोई मिले शहर का सौदा कर दूं

बंद हों आँखें तो दीदार होता है
सोचता हूँ नींद से तौबा कर दूं

पड़ते हैं जहाँ शैतान को पत्थर
तेरे कूचे को वो मक्का कर दूं

रटता है दिल हर पल इक नाम
सैयाद के हवाले ये तोता कर दूं

ज़िंदगी के लिबास में मौत की बेवा
पूछती है निकाह पक्का कर दूं

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

20 कविताप्रेमियों का कहना है :

Disha का कहना है कि -

क्या कह दिया है आपने सुभान अल्लाह
दिल कहता है मैं भी एक गज़ल कह दूँ.

http://deepali-disha.blogspot.com

विवेक सिंह का कहना है कि -

क्या बात है क्या बात है !

विवेक सिंह का कहना है कि -

क्या बात है क्या बात है !

neeti sagar का कहना है कि -

बंद हों आँखें तो दीदार होता है
सोचता हूँ नींद से तौबा कर दूं

बहुत अच्छा शेर लगा ,,,

Shamikh Faraz का कहना है कि -

ज़िंदगी के लिबास में मौत की बेवा
पूछती है निकाह पक्का कर दूं

बहुत खुबसूरत ग़ज़ल.

ओम आर्य का कहना है कि -

कबिले तारिफ..........

आलोक सिंह "साहिल" का कहना है कि -

विपुल भाई, आखिरी की पंक्ति में तो आपने जान ही हत ली...
बहुत ही जानदार प्रस्तुति...
आलोक सिंह "साहिल"

BRAHMA NATH TRIPATHI का कहना है कि -

बहुत अच्छा विपुल भाई

पड़ते हैं जहाँ शैतान को पत्थर
तेरे कूचे को वो मक्का कर दूं
ये शेर बहुत अच्छा लगा
बहुत बढ़िया बधाई

योगेन्द्र मौदगिल का कहना है कि -

वाहवा.................

मुहम्मद अहसन का कहना है कि -

यह ग़ज़ल अगर किसी कस्बे के भी मुशाएरे में पढ़ी जाए तो हूट हो जाए गी . पहला शे'एर छोड़ के कोई प्रभाव नहीं डालता है.

neelam का कहना है कि -

ahsan bhaai ,
khaas aapke liye hi

kudarat ko bhi naapasand hai sakhti bayaan me ,

bakshi nahi usne bhi haddi jubaan me ,

ye waali baat aapko kaisi lagi .bataayiytega jaroor

manu का कहना है कि -

kudarat ko naapasand hai sakhti bayaan me ,

bakshi nahi "hai" usne bhi haddi jubaan me ,

ab shaayad theek hai...
:)

par ye vipul bhaai to apne DARD-SPESHLIST the.... ye aaj kis mood mein hain...

मुहम्मद अहसन का कहना है कि -

नीलम जी,
अच्छा शे'एर है. पसंद आया.
तल्क़ीन के लिए शुक्रिया. आप की बातों से हमेशा लुत्फ़न्दोज़ होता हूँ.
मनु जी,
शुक्रिया

तपन शर्मा का कहना है कि -

बंद हों आँखें तो दीदार होता है
सोचता हूँ नींद से तौबा कर दूं...

विपुल भाई... मुझे तो ये पसंद आया...
बाकियों में वो मज़ा नहीं....

mohammad ahsan का कहना है कि -

तौबा कर दूं...
वैसे 'तौबा कर लूँ ...' मुहावरा एस्ते'माल होता है. कृपया इस की पुष्टि एनी स्रोतों से भी कर लें

Manju Gupta का कहना है कि -

Short-sweet gazal.

sada का कहना है कि -

बंद हों आँखें तो दीदार होता है
सोचता हूँ नींद से तौबा कर दूं।

बहुत ही बढि़या लिखा है आपने ।

अर्चना तिवारी का कहना है कि -

बहुत खुबसूरत ग़ज़ल...बधाई

विपुल का कहना है कि -

मुझे ग़ज़ल सुनना उतना ही पसंद है जितना लिखना नापसंद! अव्वल तो यह हज़ल है ग़ज़ल नहीं|मुशायरे में बुलाया जाउ ये हसरत भी नहीं| दिल से निकली बात में यकीन रखता हूँ चाहे शैली कोई भी हो|गज़ल मेरा इलाक़ा नहीं..मनु जी अगली बार दर्द से ही रुबरू होंगे आप|
नीलम जी बढ़िया शेर सुनाने के लिए धन्यवाद और एहसान जी यूँ ही खरी-खरी कहते रहिए| सुधार के लिए कमियाँ जानना पहली आवश्यकता है|
आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद

Ambarish Srivastava का कहना है कि -

बंद हों आँखें तो दीदार होता है
सोचता हूँ नींद से तौबा कर दूं

ये शेर अच्छा लगा
बधाई

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)