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Friday, May 29, 2009

बोल कैसा बेवफा कह दूं उसे


गजल

अपनी शर्तों पर हमेशा की तरह
मैं जिया हूँ जिन्दगी अपनी तरह

प्यार को न कैद कर सकता कोई
ये सदा उड़ता है खुशबू की तरह

आंसुओं का सार है ये शायरी
शब्द चाहे दो बदल कितनी तरह

बोल कैसा बेवफा कह दूं उसे
दे सका ना गम भी वो अच्छी तरह

दर्द से जीवंत है अब तो 'अरुण'
अब धड़कती है गजल दिल की तरह

अरुण मित्तल 'अद्भुत'

(बहर: फाइलातुन फाइलातुन फ़ाइलुन)

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10 कविताप्रेमियों का कहना है :

Stress का कहना है कि -

प्यार को न कैद कर सकता कोई
ये सदा उड़ता है खुशबू की तरह

आंसुओं का सार है ये शायरी
शब्द चाहे दो बदल कितनी तरह

बोल कैसा बेवफा कह दूं उसे
दे सका ना गम भी वो अच्छी तरह

तीनो ही शेर बहुत अच्छे लगे, मुझे गजल के बारे में बहुत अधिक ज्ञान तो नहीं है पर इन शेरों में आपने काफी अच्छे भावः प्रस्तुत किये हैं .........

रानी शर्मा

manu का कहना है कि -

बोल कैसे बेवफा कह दूं उसे,
दे सका गम भी न वो अच्छी तरह.........

सभी शेर खूबसूरत ...पर ये वाला बेमिसाल शेर ,
जाने आपसे कैसे हो गया ....( ये तो दिल पर अच्छी चोट माँगता है भाई )
या शायद .....(दे सका गम भी न वो अच्छी तरह )
ये कारण रहा हो इस के पीछे....
मतला और मक्ता बराबर आपको ही पेश कर रहे हैं...
और शब्द दो चाहे बदल जितनी तरह....कमाल,,,,,

Nirmla Kapila का कहना है कि -

बोल कैसे बेवफा कह दूँ उसे्
दे सका ना गम भी वो अच्छी तरह्
बहुत ही सुन्दर गज़ल के लिये अरुण जी को बधाई और हिन्द युग्म के लिये धन्यवाद्

mohammad ahsan का कहना है कि -

achchhi gazal.
आंसुओं का सार है ये शायरी
शब्द चाहे दो बदल कितनी तरह
yeh sh'er bahut hi umda qism ka.

निखिल आनन्द गिरि का कहना है कि -

लय ठीक है, थोड़ा वजन बढ़ाने की कोशिश और चाहिए.....अपनी नहीं, शेरों की....
निखिल

संगीता पुरी का कहना है कि -

बहुत बढिया लिखा है।

रश्मि प्रभा... का कहना है कि -

आंसुओं का सार है ये शायरी
शब्द चाहे दो बदल कितनी तरह
...बहुत ही सही पेशकश...

vani sharma का कहना है कि -

sachmuch adbhut !!!!!

Deep का कहना है कि -

बोल कैसा बेवफा कह दूं उसे
दे सका ना गम भी वो अच्छी तरह

adbhut.. bahot khoobsurat

SUJEET KUMAR का कहना है कि -

वाह भाई क्या परिभाषा दी है आपने एक बेवफा के लिए
वही है बेवफा जो अच्छे से गम दे सके ; काफी खुबसूरत लफ्ज है आपके अरुण जी

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