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Friday, May 01, 2009

ओछी हरकत


( घरेलु हिंसा के विरुद्ध संघर्ष – एक शीर्षक )

मारपीट अब बहुत हो गई
ओछी हरकत अब न सहूँगी

खौफ़ दिया क्रूर कर्मों से
भँडास निकाली जी भर कर
रोई मैं चुपचाप अकेले
करवट बदली रात-रात भर

पर न बहाऊंगी सावन अब
बिजली बन कर कड़कूँगी मैं
वार किया तो चूप न रहूँगी

मारपीट अब बहुत हो गई
ओछी हरकत अब न सहूँगी

प्रतिकार में तेवर बदलु
माथा मेरा ठनक गया तो
एक चीख न्यायालय पहुँचे
बात बात में तुनक गया तो

जहर बहेगा आँचल से
आँखों से खून के फव्वारे
प्रतिशोध से क्यों न कहूँगी

मारपीट अब बहुत हो गई
ओछी हरकत अब न सहूँगी
-हरिहर झा



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8 कविताप्रेमियों का कहना है :

neelam का कहना है कि -

जहर बहेगा आँचल से
आँखों से खून के फव्वारे

aakrosh ki paraakashtha .

मुकेश कुमार तिवारी का कहना है कि -

हरिहर जी,

कविता सीधे सीधे हाल कुछ इस तरह बयाँ करती है कि जैसे किसी आँखों देखे हाल को सुना जा रहा हो।

ऐसे ही ना जाने कितने दृश्य हमारे मन पर अंकित होंगे, उन्हें आपने बाहर ला, झाड़-पोंछ शब्द दे दिये।

बधाईयाँ

मुकेश कुमार तिवारी

mohammad ahsan का कहना है कि -

siidhi-saadhi, saral, samajh mein aane wai kavita.
is ki saadgi hi is ki khoobsoorti hai.
-ahsan

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

हैं वही हालात
तुम कमजोर या मजबूत हो,
यह तुम्हीं को
करना है तय.
तुम हार लो
या जीत लो.

Priya का कहना है कि -

प्रतिकार में तेवर बदलु
माथा मेरा ठनक गया तो
एक चीख न्यायालय पहुँचे
बात बात में तुनक गया तो

" khushi mein tewar nahi badaltey....... justice ke liye...ladna to padega hi. ... accha prayas

manu का कहना है कि -

हिंद युग्म पर ओछी हरकत,,,,,,
हम तो घबरा ही गए थे,,,,, अब तो हम ऐसे कमेंट भी नहीं करते ,,,,,
फिर आपकी रचना पढी,,,,,
to pataa lagaa,,,,

बहुत अच्छी है,,

shanno का कहना है कि -

झा जी,
सदियों से विभिन्न रूपों में सताई हुई नारी का चित्र आपने अपने शब्दों में बखूबी उतार दिया है. दुनिया में पता नहीं कितनी औरतें दुखों की पराकाष्ठा को झेल रही हैं लेकिन आगे बढ़ कर आने की हिम्मत नहीं करतीं और जो भी करती हैं उनकी तरफ समाज प्रशंशा की वजाय तिरस्कार की नज़रों से देखने लगता है. जो औरत अपने कर्तव्यों को अच्छी तरह निभाती है वोह सम्मान की अधिकारी होती हैं, अपमान की नहीं. लेकिन किस-किस को समझाया जाये इस संसार में.

और मनु जी,
आप भी ना क्या चीज़ हैं. इतनी जल्दी घबरा क्यों जाते हैं पूरी बात बिना जाने hee. Very bad habit (ही..ही..ही..).

rachana का कहना है कि -

हरिहर जी बहुत ही सुंदर तरीके से आप ने अपनी बात कही
सच उजागर करती कविता
रचना

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