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Saturday, March 07, 2009

मेरा परिचय





मैं तुम पर आश्रित नहीं

स्वयं सिद्धा हूँ

तुम्हारे स्नेह को पाकर

ना जाने क्यों

कमजोर हो जाती हूँ

स्वयं को बहुत असहाय पाती हूँ

शायद इसलिए

तुम्हारे हर स्पर्ष में

प्रेम की अनुभूति होती है

उस प्रेम को पाकर

मैं मालामाल हो जाती हूँ

और अपनी उस दौलत पर

फूली नहीं समाती हूँ

अपनी इच्छा से

अपने को पराश्रित

और बंदी बना लेती हूँ

किन्तु तुम्हारा अहंकार

बढ़ते ही

मेरी जंजीरें स्वयं

टूटने लगती हैं

मेरी खोई हुई शक्ति

पुनः लौट आती है

और मैं आत्म विश्वास से भर

हुँकारने लगती हूँ

मेरी कोमलता

मेरी दुर्बलता नहीं

मेरा श्रृंगार है

यह तो तुम्हें सम्मान देने का

मेरा अंदाज़ है

वरना नारी

कब किसी की मोहताज़ है ?


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8 कविताप्रेमियों का कहना है :

Anonymous का कहना है कि -

शोभा जी बहुत अच्छी संवेदनाओं के साथ पूरी हुई है रचना... बधाई...
Happy womens day
नाज़िम नक़वी

रविकांत पाण्डेय का कहना है कि -

मेरी कोमलता
मेरी दुर्बलता नहीं
मेरा श्रृंगार है

शोभा जी, बहुत सुंदर एवं सारगर्भित रचना। बधाई।

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

जो सिद्धा उसको नमन, करुँ जोड़कर हाथ.

अड़कर बरगद टूटता, बचे दूब नत-माथ.

शोभा कोमलता 'सलिल', है कठोरता दोष.

नमन वहां करते सभी, जहाँ ज्ञान का कोष.

manu का कहना है कि -

शोभा जी ,
नारी की कोमलता ,,,और वज्र से भी अधिक कठोरता कहती सुंदर कविता,,,,
दोनों रूप सराहनीय ,,,,,

Nirmla Kapila का कहना है कि -

kitni sahaj satya sunder abhivyakti ko saral shabdon me kaha hai mujhe lagta hai yahi samvednaayen har naaree ki hain bahut bahut badhaai

सीमा सचदेव का कहना है कि -

bahut sundar rachana . naaree ki vinamarataa aur komalataa ko usaki kamjori hi samajh liya jaataa hai . naari divas par naari samvednaayon ko vyakt karti kavita ke liye badhaaii

rachana का कहना है कि -

सोभा जी
नारी के दोनों रूप आप ने बहुत सुन्दरता से दिखायें हैं .
दरिया बन चरणों में बह जाती है
खुद बिखर तुम को समेट जाती है
ये नारी ही है जो एसा कर पाती है
त्याग में उसके ईश्वर बसता है
सृष्टि तभी उस को सृजन का अधिकार दे जाती है
सादर
रचना

Nandan Dubey का कहना है कि -

. .
किन्तु तुम्हारा अहंकार
बढ़ते ही
मेरी जंजीरें स्वयं
टूटने लगती हैं
मेरी खोई हुई शक्ति
. .

impressive! I liked your way of expressing yourself.

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