फटाफट (25 नई पोस्ट):

Wednesday, March 18, 2009

गज़ल- अकेले में ही हमसे जिन्दगी-


मिलना है गर तुझको कभी सचमुच ही ग़म से जिन्दगी
तो आके फिर तू मिल अकेले में ही हमसे जिन्दगी

हाँ आज हम इनकार करते हैं तेरी हस्ती से ही
खुद मौत मांगेंगे, जियेंगे अपने दम से जिन्दगी

हर बार ही देखा तुझे है दूर से जाते हुए
इक बार तो आजा मेरे आँगन में छम से जिन्दगी

सुलझा दिया इक बार तो सौ बार उलझाया हमें
पाएं हैं ग़म कितने तेरे इस पेचो-खम से जिन्दगी

नाहक नहीं हैं हम इसे सीने से चिपकाये हुए
इस जख्म से सीखा है क्या-क्या पूछ हमसे जिन्दगी

हैं ‘श्याम’ गर मेरा नहीं, तो है पराया भी नहीं
कट जाएगी अपनी तो यारो, इस भरम से जिन्दगी

मुस्तफ़इलुन,मुस्तफ़इलुन,मुस्तफ़इलुन,मुस्तफ़इलुन,
२ २ १ २ २ २ १ २.२ २ १ २,२ २ १ २,

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

17 कविताप्रेमियों का कहना है :

रंजना का कहना है कि -

Waah !!

Jindagi ko dekhne ka yah najariya bhi bakhoobi bayan kiya aapne...

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

हर बार ही देखा तुझे है दूर से जाते हुए
इक बार तो आजा मेरे आँगन में छम से जिन्दगी

बहुत सुंदर है |
अवनीश तिवारी

SUNIL KUMAR SONU का कहना है कि -

behtri ghajal.
यार,दुआओं के बदले दुआ दे रहा हूँ।
खुद से निकाल के तुझे खुदा दे रहा हूँ.
रख संभाल के अपने लिए मित्र,
चुरा के तुझे बफा दे रहा हूँ .
see my bloggggggggggggggg
www.sunilkumarsonubsa75.blogspot.com

Anonymous का कहना है कि -

HEY

"अर्श" का कहना है कि -

श्याम जी नमस्कार ,
बहोत ही शानदार ग़ज़ल कही है आपने.. वो भी बड़ी और चुस्त बहर के साथ ...ये शे'र अब इसके बारे में क्या कहूँ मैं ...
नाहक नहीं हैं हम इसे सीने से चिपकाये हुए
इस जख्म से सीखा है क्या-क्या पूछ हमसे जिन्दगी
,.... उफ्फ्फ्फ्फ़ कमाल हो गया .. ढेरो बधाई आपको साहिब..


अर्श

Dr.T.S. Daral का कहना है कि -

Mere blog par aane ka shukriya. Bahut achchhi gajlen likhte hain aap.Badhai.

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

लाजवाब

संजय चतुर्वेदी का कहना है कि -

hi shyam ji........Khoobsoorati se bayan kiya hai aapne zindagi ke sath kee gayee baatcheet ko ......kafiyon ka upyog to unke roop ke anuroop hi prayog kiya hai aapne.badhaeeyan......

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

हर बार ही देखा तुझे है दूर से जाते हुए
इक बार तो आजा मेरे आँगन में छम से जिन्दगी

इस शे'र में 'छम से' का इस्तेमाल बहुत पसंद आया।

manu का कहना है कि -

अच्छी ग़ज़ल श्याम जी,
बधाई हो,,,,

neelam का कहना है कि -

सुलझा दिया इक बार तो सौ बार उलझाया हमें
पाएं हैं ग़म कितने तेरे इस पेचो-खम से जिन्दगी

नाहक नहीं हैं हम इसे सीने से चिपकाये हुए
इस जख्म से सीखा है क्या-क्या पूछ हमसे जिन्दगी

neelam का कहना है कि -

sunil ji ,
jo chura ke di gayi ,wo wafa kaisi ???????????????????//////////

neelam का कहना है कि -

chura ke tujhe ,ya phir tujhse wafa de rahaan hoon

manu का कहना है कि -

दोनों,,,,,

चुरा के तुझे भी,,,
और चुरा के तुझसे भी,,,,,,
:::::::::::))))))))))

रज़िया "राज़" का कहना है कि -

हैं ‘श्याम’ गर मेरा नहीं, तो है पराया भी नहीं
कट जाएगी अपनी तो यारो, इस भरम से जिन्दगी।


तू इन ख़यालों में सही, आके तसल्ली हमको दे,

वरना उधर मर जायेगी कोइ शरम से ज़िन्दगी।

M.A.Sharma "सेहर" का कहना है कि -

हर बार ही देखा तुझे है दूर से जाते हुए
इक बार तो आजा मेरे आँगन में छम से जिन्दगी

श्याम जी
उम्दा ग़ज़ल
ज़िन्दगी से वार्ता

बहुत खूब !!!

सादर !!

श्याम सखा ‘श्याम’ का कहना है कि -

आप सभी का मेरी रचनाओं को जो आशीर्वाद मिलता है,उससे मेरी रचनाओं का आगामी सफ़र खुशनुमां हो जाता है-आभार
श्याम सखा ‘श्याम’

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)