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Thursday, November 20, 2008

चुड़ैल


नहीं बनाना मुझे सहेली-वहेली
खुश हूँ अपने आप में
बस अपने काम से काम
मेरा अंतर्मुखी स्वभाव इजाजत नहीं देता
यह क्या हो गया है मुझे पता नहीं
क्यों मैं अपने आप में सिमटती जा रही हूँ?

हार गई वह बेचारी
मेरा दुखी मन सहला-सहला कर
कितना मुश्किल है यह सब !
पर न उठी मेरे मन के गलियारे में
खुशियां और किलकारियां
तो सुना डाली उसने मुझे वह
टिमटिमाते तारों में छिपी कहानी
खोल दी अपनी अंतरंग दास्तान
चाहती तो बचा कर रख सकती थी
अपने पति को
जिसके पैरों की आहट थी
सौगात मेरे लिये
पर सहेलीनुमा विश्वास जीतने के लिये
भेजे ई-मेल
दिखा डाले उसने
अपने हनिमून पर लिये फोटो
कुछ विडम्बना ही हुई थी ऐसी
वह भी जानती है
उन फोटो में उसकी जगह पर
मैं हो सकती थी
पर अंगड़ाई ली समय ने
मैं पत्थर-दिल
सह गई सब कुछ
कब उठे और
कब अर्पित हुये भाग्य को
मेरे विद्रोह
एहसास भी न हुआ किसी छोर पर
पर अब मैं अनाप-शनाप
कुछ भी सोंचती हूँ
कि चुड़ैल है वह !
पगला गई हूँ
नहीं जान पाती
कि क्यों चिड़ायेगी वह बच्चों की तरह
या जलायेगी मुझे
कि मेरा प्रेमी है उसके कब्जे में
भला क्यों छिड़केगी
जले पर नमक ?
क्यों रखेगी बार बार
मेरी दुखती रग पर हाथ?
पर मैं हूँ कि कतराती हूँ
आँख चुराती हूँ उससे
अशिष्ट होती जा रही हूँ उसके साथ ।

-हरिहर झा

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11 कविताप्रेमियों का कहना है :

Anonymous का कहना है कि -

एक बेकार रचना

Anonymous का कहना है कि -

मैं इस कविता को टिप्‍पणी के लिए रचना जी पर छोडता हूँ क्‍योंकि एक वही हैं जो किसी भी कविता को full marks
दे देतीं हैं।

neeti sagar का कहना है कि -

आपकी रचना में एक सहेली ने अपनी ही सहेली के प्रेमी को छीन लिया है!और उस सहेली के पीड़ित मन को आपने बहुत अच्छी तरह समझा है! इसके लिए आपको बहुत-२ बधाई!

rachana का कहना है कि -

छुपे हुए महोदय जी .एक बात कहूं कोई भी चीज एकदम बुरी नही होती कुछ न कुछ अच्छाई सब में होती है चाहे वो व्यक्ति हो या कविता तो अच्छी चीज की तारीफ करती हूँ तो क्या बुरा करती हूँ .
नीति जी को आप क्या कहेंगें ?
जीवन में अच्छाई देखने की कोशिश कीजिये
सादर
रचना

rachana का कहना है कि -

बात फुल मार्क्स देने की नही है अच्छाई ढूंढ के उस को लिखने की है आप को एक बात बताऊँ की अब जब भी कुछ लिखती हूँ आप की बात सदा याद रहती है
सादर
रचना

manu का कहना है कि -

RACHNA JI, KYA BAAT KAHI HAI. "CHHUPE HUYE MAHODAY JI!" WAAH!!

sumit का कहना है कि -

अनाम जी,
शायद आप कविता के भाव नही समझ पाये, मुझे तो ये एक स्त्री की मनो दशा लगी जो अपनी सहेली को कोस रही पर अंत मे अपनी भूल(कोसने पर) प्रायशिचत करती लगी ।

एक बहुत ही सुन्दर कविता, सामानय मानव विचारो से प्रभावित

सुमित भारद्वाज

sahil का कहना है कि -

achha hai ki kisi kavita ko vaahiyaat karar de diya jaye par kya iske liye anaam hona anivary shart hai?
khair,ausat kavita,harihar ji aap ke kad ke hisab se.
ALOK SINGH "SAHIL"

sumit का कहना है कि -

अनाम जी,

कृपया बेकार की टिप्पणी और औरो के बारे मे बुरा कहने की बजाय कविताओ के भाव समझने की कोशिश कीजिये

मैने आपकी और कविताओ पर भी टिप्पणी पढी और हमेशा आप को दोष देते हुए ही पाया, पता नही आप दीपक तले अंधेरा और चाँद मे दाग कैसे देखते हो?

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

कविता मनोदशा को दर्शाना होता है
अच्छा बुरा कविता नही जमाना होता है
घटनायें तो हमेशा सच्ची ही घटती है
पर कुछ लोगों के नज़र में फसाना होता है

हरिहर झा जी ने एक व्यथा दर्शायी है
शब्दों के रास्ते आयी है तो कविताई है
किसी को भायी हो या ना भायी हो भाई
पर हमको तो सच में बहुत भायी है
तो कविता के लिये बरम्बार बधाई है
बरम्बार बधाई है...बरम्बार बधाई है...

vuong का कहना है कि -

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