यौवन के घनेरे बालों की खुशबू
तिस पर ऐसा मोहक अनुरोध
अनमोल है यह पल
इस निराले उन्माद में
यह रूठना मनाना
नाजुक कलाई से उभरता प्यार
कल भले ही मरघट की
सीढ़ियों पर चढ़ कर
गुमनाम हो जाय
उल्का की तरह चमक कर
विलुप्त हो जाय
न जाने कब धूल-धुसरित कर दें
काल के धागों में गुंथे अलगाव;
कला से ढांपे हुये जिस्म
रूह को बाजारी बना दें
गुणवत्ता के मापतोल
दूकानों पर मिलते कमिशन
लचीली शर्तें
मोहक विज्ञापन के जादू
बाजार-भाव के एहसास
लाभ की
मनोवृत्ति से उफनती आँच
न जाने कब
इस क्षण के घरौंदे को
लपेट कर
सब कुछ निगल जाय !
-हरिहर झा







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12 कविताप्रेमियों का कहना है :
बाजार-भाव के एहसास
लाभ की
मनोवृत्ति से उफनती आँच
न जाने कब
इस क्षण के घरौंदे को
लपेट कर
सब कुछ निगल जाय !
सुंदर भाव ......seema sachdev
कविता का भावः मैं समझ रही हूँ,! पर कविता को नाम दिया बाज़ार भाव वो मुझे समझ नही आया! शायद मैं अभी सीख रही हूँ इसलिए आपसे माफ़ी चाहूंगी, मुझे लगा कविता मैं कुछ और भावों की ज़रूरत थी,,,,
thik thak bhaw ubhar aaye,achhi nahin kah sakta par achhi jaisi kavita.
ALOK SINGH "SAHIL"
पिछली रचनाओ के मुकाबले कुछ कमजोर लगी
सुमित भारद्वाज
और नीति जी कि बात से सहमत हूँ शीर्षक कविता से मेल नही खा रहा
kavita me bhavbodh badhiya hai .....
jari rahe....
माननीय,
अनमोल है यह पल
कल भले ही मरघट की
सीढ़ियों पर चढ़ कर
गुमनाम हो जाय
.
सुंदर शब्द संयोजन |
पल भी वर्षा बूंद की मानिंद होते है | न जाने किस पल को स्वाति सीप संजोग मिले |
सादर
विनय के जोशी
बहुत सुन्दर लगी आपकी काव्याभिव्यक्ति..
अतयंत गहराई लिये..
बहुत बहुत बधाई
भाव अच्छे हैं,
नाजुक कलाई से उभरता प्यार
उपरोक्त उपमा ऊपर से गुज़र गयी!
कल भले ही मरघट की
सीढ़ियों पर चढ़ कर
गुमनाम हो जाय
उल्का की तरह चमक कर
विलुप्त हो जाय
न जाने कब धूल-धुसरित कर दें
बहुत अच्छा लिखा है.
काफी पेचीदी कविता है। पूरी तरह से समझ में नहीं आई।
कला से ढांपे हुये जिस्म
रूह को बाजारी बना दें
गुणवत्ता के मापतोल
दूकानों पर मिलते कमिशन
लचीली शर्तें
मोहक विज्ञापन के जादू
बाजार-भाव के एहसास
लाभ की
मनोवृत्ति से उफनती आँच
न जाने कब
इस क्षण के घरौंदे को
लपेट कर
सब कुछ निगल जाय !
aaj ke parprekchay me bilkul sahi ,
kavita ko wahi shabd ,jo sabhi ke manon ,me hai dene par aap ka shukriya
लाभ की
मनोवृत्ति से उफनती आँच
न जाने कब
इस क्षण के घरौंदे को
लपेट कर
सब कुछ निगल जाय !
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