Saturday, August 02, 2008

गम दिये दी खुशी शुक्रिया जिन्दगी

गम दिये दी खुशी
शुक्रिया जिन्दगी

तम हुआ खत्म तब
जब दिखी रोशनी

यूं जतन लाख थे
बात पर कब बनी

मर मिटे हैं सभी
वाह री सादगी

दर्द ज्यों-ज्यों बढ़ा
बढ़ गई बंदगी

सभ्यता खा गई
ये नई रोशनी

है नहीं 'श्याम' क्या
सिरफ़िरा आदमी

--यूनिकवि श्याम सखा 'श्याम'

11 टिप्पणी:

sab kuch hanny- hanny said...

गम दिये दी खुशी
शुक्रिया जिन्दगी

तम हुआ खत्म तब
जब दिखी रोशनी
waah bahut khub

seema gupta said...

मर मिटे हैं सभी
वाह री सादगी

दर्द ज्यों-ज्यों बढ़ा
बढ़ गई बंदगी
" ek pyaree see sunder kavita"

शोभा said...

दर्द ज्यों-ज्यों बढ़ा
बढ़ गई बंदगी

सभ्यता खा गई
ये नई रोशनी
बहुत बढ़िया लिखा है।

Anonymous said...

गम दिये दी खुशी
शुक्रिया जिन्दगी
great! real positive thoght

kamal

अवनीश एस तिवारी said...

इतना प्रभावी नहीं है |
मुझे नहीं भाया |


अवनीश तिवारी

RC said...

Bahut khoob. Kam se kam shabdon mein sab keh dala.

josef said...

Bahut khoob. Kam se kam shabdon mein sab keh dala.

yehi mujhe kahana hai-josef

Shailesh Jamloki said...

श्याम जी . .
आपकी ग़ज़ल
१) एक बेहद खूबसूरत ग़ज़ल है क्यों की इसे पढ़ कर यूं लगा की, ग़ज़ल लिखना इतना अस्सं है क्या?
२) क्या कभी कोई ग़ज़ल इतने कम शब्दों मै इतना प्रभावित कर सकती है...? इस ग़ज़ल को पढ़ कर लगा.. बिलकुल...
३)मै भी आपकी ग़ज़ल की भाषा मै ये कहना चाहूँगा..
"पढ़ के बस यूँ कहा
वाह जी!! वाह जी!!"

सादर
शैलेश

diya22 said...

mere khyal se thodi aur badi honi chahiye thi.kyunki bahut acchi hai aur man karta hai abhi khatam na ho

BRAHMA NATH TRIPATHI said...

श्याम जी आपने छोटी सी ग़ज़ल में बड़ी बात कही काफ़ी अच्छा लगा पढ़कर

दर्द ज्यों-ज्यों बढ़ा
बढ़ गई बंदगी

ये शेर मुझे बहुत अच्छा लगा

श्यामसखा said...

शैलेश जमलोकी !भाई गज़ल लिखना वाकई मुश्किल नहीं है।उसे मुश्किल वे लोग बना देते हैं,जिन्हे गज़ल छंद का थोड़ा ज्ञान हो जाता है और खुद को उस्ताद समझना शुरू कर देते हैं।सौभाग्य से जिन्दगी भर मुझे हर क्षेत्र में गुणी व सह्र्दय लोग मिले अतः चाहे डाक्टरी ,फोटोग्राफी या गजल या फिर खुश रहाना आसानी से सीख गया।master चाहे नहीं बना किसी विधा का लेकिन बुद्धू भी नही रहा। श्यामसखा
पुनश्च -आपने तो इस गजल मे एक और शे‘र का इजाफ़ा कर दिया-जिन्दगी की साथ-साथ आपका भी शुक्रिया