फटाफट (25 नई पोस्ट):

Sunday, August 24, 2008

राह मिल्यो वो छैल छबीलो


जब तैं प्रीत श्याम सौं कीनी
तब तैं मीरां भई बांवरी,प्रेम रंग रस भीनी
तन इकतारा,मन मृदंग पै,ध्यान ताल धर दीनी
अघ औगुण सब भये पराये भांग श्याम की पीनी
राह मिल्यो वो छैल-छ्बीलो,पकड़ कलाई लीनी
मोंसो कहत री मस्त गुजरिया तू तो कला प्रवीनी
लगन लगी नन्दलाल तौं सांची हम कह दीनी
जनम-जनम की पाप चुनरिया,नाम सुमर धोय लीनी
सिमरत श्याम नाम थी सोई,जगी तैं नई नवीनी
जब तैं प्रीत श्याम तैं कीनी

--डॉ॰ श्याम सखा 'श्याम'

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

4 कविताप्रेमियों का कहना है :

वीनस केसरी का कहना है कि -

श्याम जी
बहुत सुंदर प्रस्तुति .....

जनम-जनम की पाप चुनरिया,नाम सुमर धोय लीनी .......... (यह आस्था ही तो है)

वीनस केसरी

देवेन्द्र पाण्डेय का कहना है कि -

श्याम सरिस सुंदर रची कविता
मोरो मन हर लीनी
श्याम सखा तूने म्हारे को
श्याम रंग रंगी दीनी

जै श्री कृष्ण।

Unknown का कहना है कि -

Bahut sunder bhajan hai. Badhaee.
Janmashtamee ki shubh kamnaen.

Vinaykant Joshi का कहना है कि -

shyamji,
बहुत सुंदर, बहुत अच्छा लगा |
vinay

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)