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Sunday, February 17, 2008

गोवा के नवलेखन शिविर में मैं भी भागीदार रही


मित्रो,

मुझे आप सबसे यह बताते हुए हार्दिक खुशी हो रही है कि दिनांक २९ जनवरी से ५ फरवरी तक केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय , मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार ,नई दिल्ली की तरफ से आयोजित हिंदीतर भाषी हिन्दी नव लेखन शिविर में भाग लेने का अवसर मुझे तीसरी बार प्राप्त हुआ। यह शिविर गोवा विश्वविद्यालय, गोवा में गोवा विश्वविद्यालय एवं गोमन्तक राष्ट्रभाषा विद्यापीठ, मडगाँव के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। इस प्रकार के शिविरों में साधारणतः हिंदीतर भाषी हिन्दी नव लेखकों को साहित्य की विधाओं के बारे में विस्तृत और आधुनिकतम जानकारी दी जाती है तथा नव लेखकों द्वारा लिखी गई रचनाओं पर चर्चा होती है, उनमें संशोधन किए जाते हैं, चार स्थापित साहित्यकार के मार्गदर्शन से नव लेखकों की सोच और लेखन को सकारात्मक दिशा मिलती है। परम सौभाग्य की बात है कि मुझे प्रो॰ डॉ॰ जगमल सिंह, डॉ॰ शोभनाथ यादव, डॉ॰ दिनेश कुश्वाहा एवं डॉ॰ रोहिताश्व जैसे प्रवर सुविज्ञों के बीच समय बिताने का अवसर प्राप्त हुआ। इन सभी ने संबंधित विषयों की (कविता, कहानी, नाटक, अनुवाद, पत्रकारिता आदि) सूक्ष्म पहलुओं को उजागर करते हुए अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। इन विचारों का विनिमय भावनात्मक व्यक्तिकरण को आँच देती आतंरिक वृत्तिओं को सब और से मोड़ कर एकाग्र होने की ओर प्रवृत्त कर रहा था। मार्गदर्शक बड़े ही आकर्षक ढंग से कल्पना को दिशा देकर उत्साह एवं कर्तव्यबोध को भी दिशा दे रहे थे। सृजनात्मक एवं समालोचनात्मक प्रतिभा को उभारने की सफल कोशिश कर रहे थे। ज्ञान और कल्पना को संवेदना और बुद्धि से रंजित करते हुए, ऊर्धस्वित भावनाओं को पृष्ट करते हुए, कविता के सत्र में पढ़ी गई कविताओं पर टिपण्णी करते हुए कविता के अभिव्यंजना, भाव पक्ष, कला पक्ष, सौन्दर्यबोध पर प्रकाश डाला। कहानी के स्वरूप, संरचना, सीमा के बारे में विस्तृत जानकारी मिली। प्रयोजनमूलक हिन्दी के ज्ञान को सुदृढ़ कराने हेतु पत्रकारिता व अनुवाद के बारे में भी बताया। ख़ास तौर से मैं कुलदीप कौर मैडम (सहायक निदेशक ,केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय ,मानव संसाधन विकास मंत्रालय, दिल्ली ) एवं नसीम सर जी का शुक्रिया अदा करना चाहूंगी जिनकी वजह से मुझे यह सौभाग्य प्राप्त हुआ। हिन्द-युग्म के सभी हिन्दी तर भाषी हिन्दी कवि व लेखकों से आग्रह है कि वे भी इस शिविर में शामिल होना चाहें तो अपनी रचनाएं केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा विभाग, पश्चिमी खंड-७, रामकृष्णपुरम, नई दिल्ली ११००६६ के पते पर भेजें ताकि वे भी इस प्रकार के शिविर में भाग लेने का आनंद उठा सकें ...मार्ग व्यय, रहने की व्यवस्था के बारे में निश्चिंत रहें .....:-)

सुनीता यादव

शिविर में खींची गईं कुछ तस्वीरें ....










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10 कविताप्रेमियों का कहना है :

sunita (shanoo) का कहना है कि -

बहुत बहुत बधाई सुनीता...सचमुच बहुत अच्छा लगा...आप जीवन में हमेशा एसे ही प्रगतिशील रहे यही मनोकामना है...

रंजू का कहना है कि -

बधाई सुनीता जी .यूं ही आगे बढे यही शुभकामना है !!

मोहिन्दर कुमार का कहना है कि -

बधाई हो,
लेख व चित्रों के माध्यम से पूरा हाल बताने के लिये शुक्रिया व भविष्य के लिये शुभ कामनायें

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

5बहुत बहुत बधाई |

अवनीश तिवारी

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

सुनीता जी,

आप बेहद बधाई की पात्र हैं..आपकी उर्जा प्रशंसनीय है।

*** राजीव रंजन प्रसाद

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

सुनीता जी,

हार्दिक बधाई.. आप शिखर पर पहुँचे - शुभकामनायें.

sahil का कहना है कि -

बहुत खुशी हुई,सुनीता जी आपकी प्रगतिशील सक्रियता देखकर गौरव कि अनुभूति सहज ही होने लगती है,बहुत बहुत शुभकामनाएं.
आलोक सिंह "साहिल"

RAVI KANT का कहना है कि -

सुनीता जी, बधाई। इसी तरह उत्तरोत्तर प्रगति करती रहें।

Alpana Verma का कहना है कि -

बधाई सुनीता जी बधाई.....

भविष्य के लिये शुभकामनायें

Gita pandit का कहना है कि -

सुनीता जी !

बहुत बहुत बधाई

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