पिछली दो कक्षाएं मैं नहीं ले पाया दरअसल ल में कहीं पर कुछ उलझन हो गई थी जिसके कारण ये हुआ ।जीवन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है किन्तु फिर भी संघर्ष तो जीवन का ही नाम है । कहीं पर उलझ गया था अब कुछ सुलझा तो वापस आया हूं अपनी कक्षाओं में । एक बात और कहनी है वो यह कि मेरी एक कहानी 'इन्दौर' से प्रकाशित होने वाली 'नई दुनिया ' ने प्रकाशित की है क्या होता है प्रेम । जो http://www.naidunia.com/articles_m.asp?article_no=21008021702&yy=2008&mm=2&dd=17&title=Œub+¢gt+ntu;t+ni?&author=vkfUs+mwceh यहां पर है आप भी पढें और बताएं कि कैसी लगी । हो सकता है आपको पढंने के लिये फांट डालना पडें वो यहां http://www.naidunia.com पर से ले लें । बताएं अवश्ययह कि कैसी लगी। कहानी एक दुखांत कहानी है, जो कि एक मासूम से बच्चे और एक कवि के बीच के संवादों पर है ।
तो बात जो काफिये से चली थी तो एक बार विस्तृत विश्लेषण कर लिया जाए । काफिया वही है जो कि ग़ज़ल की जान है और अक्सर हम ग़ल़ती भी क़ाफियाबंदी में ही करते हैं । ग़लत काफिया पूरी ग़ज़ल को ख़त्म कर देता है । क़ाफिया दोहराना भी ठीक नहीं होता है ।
अभी तक हमने जो काफिये देखे उनके एक एक उदाहरण आज हम लेंगें
1: सामान्य केवल शब्दों का काफिया
मंजि़ले इश्क़ में हस्ती से गुज़र जाना था
तुमको जीने की तमन्ना है तो मर जाना था
यहां पर केवल धर, घर, हुनर, उतर जैसे शब्दों के ही काफिये लाने होंगें । हां एक बात जो ध्यान में रख्ना है वो ये है कि हर शब्द का अंत अक्षर र के साथ हो ये बात है शब्दों के काफिये की ।
2: मात्रा आ का काफिया
शाम से रास्ता तकता होगा
चांद खिड़की में अकेला होगा
यहां पर आ की मात्रा ही काफिया है अब जो भी होगा वो आ की मात्रा का ही होगा । चेहरा, बेटा जैसे काफिये लिये जा सकते हैं ।
3: मात्रा आ मगर किसी खास अक्षर के साथ ही संयुक्त होकर
जाम आंखों से सरे महफिल पिलाया जाएगा
मयकशी का दोष रिंदों पर लगाया जाएगा
अब यहां पर जो अंतर है वो ये है कि आपने आ की मात्रा को मतले में य के साथ संयुक्त करके लिया है अत: आपको अब इस बंदिश का पालन करना है और उठाया, गिराया, चलाया जैसे काफिये तलाश करने हैं ।
4: आ की मात्रा किसी खास अक्षर के साथ तथा पूर्व में भी कोई खास अक्षर
धुंआ इतना पसरता जा रहा है
चमन बेरंग करता जा रहा है
यहां पर त वो अक्षर है जो आ की मात्रा के साथ संयुक्त हो रहा है किंतु एक बात और जो हो रही है वो ये है कि पूर्व में र की आवृति हो रही है मतले में । अत: आपको लेना होगा र फिर त और फिर आ की मात्रा । मसलन बिखरता, मुकरता, मरता आदि ।
5: मात्रा आ का काफिया मगर अं की बिंदी के साथ
ज़ज्बों के अक्स मंज़रे इम्कां में रह गए
बिखरे हुए गुलाब शबिस्तां में रह गए
यहां पर भी आ ही है पर अं के साथ संयुक्त होकर आ रहा है । अत: काफिये भी वैसे ही रहेंगें गिरहबां, जां, हां जैसे काफिये तलाश करें क्योंकि आपको अं के साथ संयुक्त करना है ।
6: मात्रा आ का काफिया अं की बिंदी के साथ किंतु किसी एक ही अक्षर के साथ संयुक्त होकर
जाने अब शख्स वो कहां होगा
खुश ही होगा मगर जहां होगा
यहां पर है तो आ की मात्रा और वो भी अं की बिंदी के साथ ही किंतु केवल ह अक्षर के साथ ही संयुक्त होने की बंदिश है । मसलन यहां, वहां, जहां, कहां, आदि।
7: मात्रा ई का काफिया
जमाने से न पूछूंगा न अपने जी से पूछूंगा
मुहब्बत क्या है तेरे हाथ की मेंहदी से पूछूंगा
यहां पर केवल ई की ही बंदिश है क्योंकि मतले में जी और दी का मिलान किया है अत: शाइर ने अपने को स्वतंत्र कर लिया है कुछ भी काफिया लेने के लिये मसलन नदी किसी आदि
8 : ई का काफिया पर किसी खास अक्षर की बंदिश के साथ ही
जिन्दगी माना हबाबी फूल सी खिलती तो है
बेवफा होते हुए भी बावफा लगती तो है
इसमें आपने ई की मात्रा को त के साथ काफिया बनाया है अत: रहती, चलती, कटती जैसे काफिये तलाश करें ।
9 : मात्रा ई का काफिया मगर दोहराव के साथ
जिन्दगी माना हबाबी फूल सी खिलती तो है
धूप है तो साथ मेरे छांव भी चलती तो है
यहां पर आपने मतले में दोहराव कर के अपने काफिया को लती कर लिया है अब आपको चलती, ढलती, खिलती, जैसे काफिये तलाश करने पड़ेगें ।
10: मात्रा ई अं की बिंदी के साथ
उसको मुझपे कभी यक़ीं होगा
और फिर फासला नहीं होगा
यहां पर वही ई की मात्रा है पर अं की बिंदी की बंदिश है अत: उसका ध्यान रखें ।
11: मात्रा ई अं के साथ तथा एक ही अक्षर की बंदिश के साथ
वो किसीका भी और कहीं होगा
पर वो मेरा कभी नहीं होगा
यहां पर सबसे मुश्किल काफियाबंदी है ह के साथ ई की मात्रा और साथ में अं की बिंदी । नहीं, कहीं, वहीं जैसे मुश्किल काफिया तलाशने होंगें ।चलिये आज केवल आ और ई को ही लेते हैं ए, ओ, उ को अगली बार लेकर मामला हल कर लेंगें । आज हमने केवल कुछ दोहराया ही है और कुछ अलग सा देखने का काम किया है ये इसलिये ज़रूरी है क्योंकि अधिकतर जो दोष आते दिखते हैं वे सारे काफिये के ही अधिक होते हैं सो हम काफिये को मजबूत कर लेंगें तो परेशानी कम हो जाएगी ।

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9 कविताप्रेमियों का कहना है :
bahut accha laga padhkar, bahut hi accha. mujhe bahut kuchh seekhne ko mila.
ek doubt hai kripya madad keejiye. khilte ke saath Chalte kafiya theek hai kya..........
Arun Mittal Adbhut
पंकज जी
आपकी कक्षा में देर से पहुँचा हूँ पर दुरुस्त पहुँचा हूँ। गज़ल पर आपकी सामग्रा और ज्ञान का कायल हुआ जा सकता है।
आभार।
*** राजीव रंजन प्रसाद
ये तो समझ आ गया समांतर से लगने वाले शब्द काफिये में हो .,जैसे जहा कहा वहा,ग़ज़ल खुब्सुरा बनती है |अगली कक्षा का इंतज़ार रहेगा
बहुत अच्छी जानकारी,धन्यवाद सर जी,अबहै की हम भी एक आध मिसरा बना लेंगे
आलोक सिंह "साहिल"
अच्छी जानकारी दी है।
पंकज जी,
आप बेहद हीं उम्दा जानकारियाँ मुहैया करा रहे हैं। इसके लिए आपका तहे-दिल से शुक्रिया।
और हाँ आपकी कहानी पढी। सच के बेहद करीब की बातें लिखी हैं आपने।बधाई स्वीकारें।
-विश्व दीपक ’तन्हा’
शुक्रिया पंकज जी
भागदौड़ ओर मुश्किल भरी जिंदगी मी आप ने वक़्त निकालकर अपनी कक्षा के लिए समय निकला. चलिए एक जगह तो ऐसी हुई जहाँ से हम उदाराहरण देकर लोगो को समझा सकते है.
ओर हाँ ,आपकी कहानी पढी, थोडी दुखद है ,उम्मीद है अगली बार कुछ हँसी भी बिखेरेंगे.
बधाई स्वीकार करे
सर जी आपकी जिन्दगी में सुख-शान्ति बने रहे इसी दुआ के साथ
आपका पाठ 8 भी पुरा पढ लिया
बहुत बहुत शुक्रिया पंकज जी आप यूं ही हमारा मार्गदर्शन करते रहियेगा ह्म से नौसखियों को बहुत फ़ायदा होता है
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