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Monday, January 14, 2008

ये तेरी याद का कमाल रहा


साल दर साल ये ही हाल रहा
तुझसे मिलना बड़ा सवाल रहा

याद करना खुदा को भूल गए
नाम पर उसके बस बवाल रहा

ना संभाला जो पास है अपने
जो नहीं उसका ही मलाल रहा

यूं जहाँ से निकाल सच फैंका
जैसे सालन में कोई बाल रहा

क्या ज़रूरत उन्हें इबादत की
जिनके दिल में तेरा ख्याल रहा

ऐंठता भर के जेब में सिक्के
सोच में जो भी तंगहाल रहा

दिल की बातें हुई तभी रब से
बीच जब ना कोई दलाल रहा

चाँद में देख प्यार की ताकत
जब समंदर लहर उछाल रहा

फूल देखूं जिधर खिलें नीरज
ये तेरी याद का कमाल रहा

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16 कविताप्रेमियों का कहना है :

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

क्या ज़रूरत उन्हें इबादत की
जिनके दिल में तेरा ख्याल रहा
-- bahut khoob dada...

Avaneesh tiwari

Alpana Verma का कहना है कि -

*ऐंठता भर के जेब में सिक्के
सोच में जो भी तंगहाल रहा

*ना संभाला जो पास है अपने
जो नहीं उसका ही मलाल रहा
*दिल की बातें हुई तभी रब से
बीच जब ना कोई दलाल रहा

वाह ! वाह !बहुत खूब कहे हैं शेर आपने !
बहुत उम्दा!

पूरी ग़ज़ल ही अच्छी लिखी हुई है!

आप की क़लम को मुबारकबाद-

जोशिम का कहना है कि -

BAHUT KHOOB
अरे यहाँ जो, सच, पहली बार मिला/ था आपका अक्स? ख़ास बेमिसाल रहा - RGDS MANISH

रंजू का कहना है कि -

क्या ज़रूरत उन्हें इबादत की
जिनके दिल में तेरा ख्याल रहा

बहुत ही खूबसूरत ख्याल ...

दिल की बातें हुई तभी रब से
बीच जब ना कोई दलाल रहा

सुंदर गजल लगी आपकी यह नीरज जी.. बधाई !!

seema gupta का कहना है कि -

दिल की बातें हुई तभी रब से
बीच जब ना कोई दलाल रहा

चाँद में देख प्यार की ताकत
जब समंदर लहर उछाल रहा

फूल देखूं जिधर खिलें नीरज
ये तेरी याद का कमाल रहा
"अच्छी ग़ज़ल कमाल के शेर , बहुत सुंदर गजल "
Regards

seema gupta का कहना है कि -
This comment has been removed by the author.
mehek का कहना है कि -

har sher nayab ban pada hai badhai

मोहिन्दर कुमार का कहना है कि -

नीरज जी,

छोटे बहर की सुन्दर गजल पिरोयी आपने. सभी शेर जानदार और गूढ अर्थ लिये हुये हैं
बधाई

Ranjana का कहना है कि -

bahut,bahut,sundar

Avanish Gautam का कहना है कि -

बढिया है नीरज जी

मुझे यह शेर सबसे ज्यादा पसन्द आया...


"यूं जहाँ से निकाल सच फैंका
जैसे सालन में कोई बाल रहा"

Shiv Kumar Mishra का कहना है कि -

बहुत खूब...अद्भुत गजल.

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

बड़ी ही सुन्दर गजल नीरज जी,

एक एक शेर काबिले तारीफ..
कई बार पढ़ा..

ना संभाला जो पास है अपने
जो नहीं उसका ही मलाल रहा

यूं जहाँ से निकाल सच फैंका
जैसे सालन में कोई बाल रहा

क्या ज़रूरत उन्हें इबादत की
जिनके दिल में तेरा ख्याल रहा

ऐंठता भर के जेब में सिक्के
सोच में जो भी तंगहाल रहा

दिल की बातें हुई तभी रब से
बीच जब ना कोई दलाल रहा

सुन्दर..

shobha का कहना है कि -

बढ़िया गज़ल है नीरज जी।
दिल की बातें हुई तभी रब से
बीच जब ना कोई दलाल रहा

चाँद में देख प्यार की ताकत
जब समंदर लहर उछाल रहा

गौरव सोलंकी का कहना है कि -

याद करना खुदा को भूल गए
नाम पर उसके बस बवाल रहा

चाँद में देख प्यार की ताकत
जब समंदर लहर उछाल रहा

फूल देखूं जिधर खिलें नीरज
ये तेरी याद का कमाल रहा

नीरज जी, आप हर बार की तरह पूरे निखरकर आए हैं। क्या बात है !

sahil का कहना है कि -

नीरज जी बहुत ही प्यारी गजल प्रस्तुत की आपने. बधाई हो
आलोक सिंह "साहिल"

नीरज गोस्वामी का कहना है कि -

मैं अपने सभी पाठकों का तहे दिल से शुक्रिया करता हूँ जिन्होंने मेरी रचना को पढ़ा और सराहा. आप सब का स्नेह ही लिखने के लिए उर्जा देता है.
नीरज

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