Friday, November 16, 2007

शब्द मेरे, बोल कह दूँ

तूने जो मुझको दिया है, शब्द मेरे, बोल कह दूँ
इसमें भी थोड़ा सहारा दे मुझे, दिल खोल कह दूँ
शब्द मेरे, बोल कह दूँ

तू मेरे जीवन का साथी, मेरा क्या तुझसे छिपा है
जो भी मैंने गीत गाया, उसको तूने ही लिखा है
हों खुशी से मुस्कराते, या सिसक आँसू बहाते
मेरे गीतों ने संभाला, मन था डाँवाडोल कह दूँ
शब्द मेरे, बोल कह दूँ

जब मेरे जीवन पे छाये, दुख के अंधियारे से बादल
आँसू जब आये दृगों में, जब हुआ अंतस भी घायल
तब मेरी उस मौन पीड़ा को भी देकर रूप गीतों का
दे दिया मुझको सहारा, यार सा अनमोल कह दूँ
शब्द मेरे, बोल कह दूँ

जब खुशी आई तनिक भी, ज़िंदगी की रहगुज़र में
मन मगन हो झूम उट्ठा, फूल खिल आए नज़र में
मेरी खुशियाँ थीं मलिन पर, बढ़ गया उनका उजाला
ताल लय पर जब ढले थे, गीत के सब बोल कह दूँ
शब्द मेरे, बोल कह दूँ

13 टिप्पणी:

Avanish Gautam said...

बढिया है अजय भाई!

रंजू said...

सुंदर है अजय जी आपकी यह रचना हमेशा की तरह !!

Anish said...

बहुत कुछ कह दिया है.
सुंदर है.
बधाई.
अवनीश तिवारी

Bhupendra Raghav said...

तू मेरे जीवन का साथी, मेरा क्या तुझसे छिपा है
जो भी मैंने गीत गाया, उसको तूने ही लिखा है
हों खुशी से मुस्कराते, या सिसक आँसू बहाते
मेरे गीतों ने संभाला, मन था डाँवाडोल कह दूँ
शब्द मेरे, बोल कह दूँ

सुन्दर लिखा है यादव जी..

shobha said...

अजय जी
अच्छा लगा बदलाव । अभी तक गज़ल ही लिख रहे थे । आज गीत लिखा है ।
जब मेरे जीवन पे छाये, दुख के अंधियारे से बादल
आँसू जब आये दृगों में, जब हुआ अंतस भी घायल
बधाई स्वीकारें

सुनीता said...

जब मेरे जीवन पे छाये, दुख के अंधियारे से बादल
आँसू जब आये दृगों में, जब हुआ अंतस भी घायल
तब मेरी उस मौन पीड़ा को भी देकर रूप गीतों का
दे दिया मुझको सहारा, यार सा अनमोल कह दूँ
शब्द मेरे, बोल कह दूँ
बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति है.....बधाई अजय जी... मौन पीड़ा को गीतों का रुप देना...वाकई
शब्द और बोल दोनों अच्छे हैं..

सुनीता यादव

सुनीता said...

जब मेरे जीवन पे छाये, दुख के अंधियारे से बादल
आँसू जब आये दृगों में, जब हुआ अंतस भी घायल
तब मेरी उस मौन पीड़ा को भी देकर रूप गीतों का
दे दिया मुझको सहारा, यार सा अनमोल कह दूँ
शब्द मेरे, बोल कह दूँ
बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति है.....बधाई अजय जी... मौन पीड़ा को गीतों का रुप देना...वाकई
शब्द और बोल दोनों अच्छे हैं..

सुनीता यादव

श्रीकान्त मिश्र 'कान्त' said...

अजय जी

तू मेरे जीवन का साथी, मेरा क्या तुझसे छिपा है
......, मन था डाँवाडोल कह दूँ
शब्द मेरे, बोल कह दूँ

................
आँसू जब आये दृगों में, जब हुआ अंतस भी घायल
तब मेरी उस मौन पीड़ा को भी देकर रूप गीतों का
दे दिया मुझको सहारा, यार सा अनमोल कह दूँ
शब्द मेरे, बोल कह दूँ

बहुत सुंदर .....

मोहिन्दर कुमार said...

अजय जी,
गजल से गीत की और का सफ़र सुन्दर है.. हिन्दी और उर्दू के शब्दों का अच्छा समागम किया है आपने... बधाई

सजीव सारथी said...

अजय जी बहुत सुंदर प्रस्तुति है , प्रेम की ऐसी अभियक्ति पढ़ कर आनंद आया

RAVI KANT said...

वाह-वाह बहुत सुन्दर अजय जी! बधाई।

tanha kavi said...

तू मेरे जीवन का साथी, मेरा क्या तुझसे छिपा है
जो भी मैंने गीत गाया, उसको तूने ही लिखा है

मेरी खुशियाँ थीं मलिन पर, बढ़ गया उनका उजाला
ताल लय पर जब ढले थे, गीत के सब बोल कह दूँ

बहुत हीं खूबसूरत बोल हैं आपके अजय जी। इन्हें कहना हीं अच्छा है। :)
दिल को भा गई आपकी रचना। बधाई स्वीकारें।

शैलेश भारतवासी said...

आप गीत विधा में उतरे और अच्छा-खासा लिख गये। आपकी यूनिकविता भी कुछ इस कमरे की रोशनी थी, लेकिन इसबार प्रकाश ज्यादा है, लेकिन कम टिकाऊँ। लालटेन की जगह ट्यूबलाइट जलाइए।