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Wednesday, April 25, 2007

आप ने हाथ.......


वक्त ने साथ जो दिया होता;
आप ने हाथ जो दिया होता।

आदमी हम भी काम के होते;
इक दफा 'हाँ' जो कह दिया होता।

हौसले की कमी न थी मुझमें;
इक इशारा जो मिल गया होता।

लोग कहते न निकम्मा मुझको;
काम मुझसे जो कुछ लिया होता।

मौत तो मिलती सुकून की मुझको;
साफ ग़र 'ना' ही कह दिया होता।

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7 कविताप्रेमियों का कहना है :

anupama chauhan का कहना है कि -

वक्त ने साथ जो दिया होता;
आप ने हाथ जो दिया होता।

हौसले की कमी न थी मुझमें;
इक इशारा जो मिल गया होता।

मौत तो मिलती सुकून की मुझको;
साफ ग़र 'ना' ही कह दिया होता।

nice lines.....keep expressing....

ajay का कहना है कि -

पंकज जी आजकल आप कुछ ज्यादा ही श्रंगारिक कविताएं लिखने लगे हैं, कोई खास वजह तो नहीं? वैसे अच्छि रचना है।

रंजु का कहना है कि -

बहुत ख़ूब....

हौसले की कमी न थी मुझमें;
इक इशारा जो मिल गया होता।

मौत तो मिलती सुकून की मुझको;
साफ ग़र 'ना' ही कह दिया होता।

गिरिराज जोशी "कविराज" का कहना है कि -

लोग कहते न निकम्मा मुझको;
काम मुझसे जो कुछ लिया होता।


आपकी ये लाईंनें तो मुझ पर भी पूर्णतया लागू हो रही है, बहुत खूब!

sunita (shanoo) का कहना है कि -

मौत तो मिलती सुकून की मुझको;
साफ ग़र 'ना' ही कह दिया होता।
सही लिखा है न खुदा ही मिला ना विसाले सनम,..न इधर के रहे ना उधर के रहे,...
अच्छी रचना है,...
सुनीता(शानू)

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

आपकी गज़लें गुनगुनाने पर समां बाँध देंगी, बेहद नपी तुली लगती हैं। ये पंक्तियाँ विशेष पसंद आयीं...

वक्त ने साथ जो दिया होता;
आप ने हाथ जो दिया होता।

लोग कहते न निकम्मा मुझको;
काम मुझसे जो कुछ लिया होता।

*** राजीव रंजन प्रसाद

मोहिन्दर कुमार का कहना है कि -

काश तुमने न चाह्तों का मीनार बनाया होता
जो तुम्हें चाहता था, उसी को तुमने चाहा होता

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