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Sunday, December 31, 2006

तुम्हारा खयाल


ये तुम्हारा खयाल नहीं है
साँसे है मेरी

इन खयालों ने ही
पुरवाईयों में ढलकर
जगाया है मुझे
रात होते ही प्यार से
गोदी में
सुलाया है मुझे

इस खयाल के ना रहते
मैं अधुरा हूँ
सोचता हूँ के कितना
मैं तुम्हारा हूँ

ना रहे खयाल तो मैं
घुट घुट के मर जाउंगा
बस इक ढेर मिट्टी का
मैं रह जाउंगा

इतनी सादी सी ज़िन्दगी की
कहानी है मेरी
ये तुम्हारा खयाल नहीं है
साँसे है मेरी

तुषार जोशी, नागपुर

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7 कविताप्रेमियों का कहना है :

Anonymous का कहना है कि -

नव वर्ष में आपके ख्याल हकीकत में तबदील हों और नया वर्ष आपके लिये खुशहाली लाये, इस हेतु ढ़ेरों शुभकामनायें, तुषार भाई.

-समीर लाल

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

तुषार जी,

ये आपकी तारी‌‍फ़ नहीं,
उद्‌गार लिख रहा हूँ।

एक महान कवि को
नमस्कार लिख रहा हूँ।

श्रीश । ई-पंडित का कहना है कि -

तुषार जी, नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान करे नववर्ष में आपके मन की सभी बातें पूरी हों।

गिरिराज जोशी का कहना है कि -

तुषार जी, नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

मैं भी शैलेशजी के ही शब्दों में कहना चाहूँगा -

ये आपकी तारी‌‍फ़ नहीं,
उद्‌गार लिख रहा हूँ।

एक महान कवि को
नमस्कार लिख रहा हूँ।

SaMaR(lna@rediffmail.com) का कहना है कि -

तुषार जी,
सर्वप्रथम नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।
अब एक ही बात कहुँगा,

अति उत्तम

prem का कहना है कि -

good

jeje का कहना है कि -

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