कैसे मुमकिन है कि ख़ुद को जान लें
अजनबी हो तो उसे पहचान लें
क्या ज़रूरी है कि सबसे ज्ञान लें
एक दिन तो अपना कहना मान लें
कोई उनसे कह दे इतना मान लें
चैन लूटा, दिल लिया अब जान लें
रात है, फ़ुर्सत भी है तन्हाई भी
आओ अब यादों की चादर तान लें
सर्द मौसम को बदलने के लिये
आओ नाज़िम धूप का एहसान लें
--नाज़िम नक़वी






